सुप्रीम कोर्ट तक दोषी साबित होने के बावजूद "न्यायाधीश" (?? क्या वाकई?) मार्कंडेय काटजू साहब, संजू बाबा को माफ करना चाहते हैं. - जबकि केन्द्र सरकार द्वारा अपने सारे "डॉगी" छोड़ने के बावजूद नरेंद्र मोदी पर एक केस भी नहीं है, फिर भी सभी "महानुभावों", सभी "माननीयों", सभी "बुद्धू जीवियों" की निगाह में वे दोषी ही हैं.
अरे भारतवासियों फ़िल्मी दुनिया में नाचने वालो / भांडों की कमी नहीं है, भोगने दो अपने कुकर्मों का फल इस भांड को- चोली के पीछे क्या है' इसका बखान करने के अलावा देश के लिए क्या योगदान है इस नचनिये का?
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